आधुनिकता से बिगड़ी पानीदार पेरू की तकनीकी विरासत
यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित कुस्को शहर फिर से आधुनिक होने की कोशिश में है ताकि लोगों को स्वच्छ पानी और हवा मुहैया करा सके. जर्मन वेबसाइट का दावा है कि पेरू में इंका सभ्यता के दौरान पानी की आपूर्ति की उनन्त तकनीक हुआ करती थी. जलस्रोत से नहरों और नालों से होकर बगीचों के बीच से गुजरते पानी का ये नजारा पेरू में 600 साल पहले खंडहर बने टिपॉन शहर का है. ये जगह आज एक छोटे से स्वर्ग सी दिखती है. हाइड्रोलिक इंजीनियर रूबेन सियेरा पालोमीनो के अनुसार यहां 300 लोग रहते थे. 3500 मीटर की ऊंचाई पर बने इस संयंत्र को इंका समुदाय के तकनीकी ज्ञान की मिसाल माना जाता है. वे सालों से इस संयंत्र पर काम कर रहे हैं. पालोमीनो बताते हैं, "टिपॉन एक बड़ी पर्यावरण प्रयोगशाला है जहां पूर्व हिस्पैनिक लोगों ने प्रकृति के संसाधनों का इस्तेमाल शुरू किया था, खासकर पानी का. यह पानी उनके अनुष्ठानों के अलावा खेती में काम आता था. इसके लिए उन्होंने खास हाइड्रोलिक प्रक्रिया ईजाद की थी. इसे हम इन नहरों, भूमिगत जल भंडारों और कृत्रिम जलसेतुओं में देखते हैं." इंका लोगों को पानी को पहाड़ों से कई सौ मीटर...