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जवाहर नगर को आदर्श वार्ड बनाएगा परिवर्तन

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इसमें कोई शक नहीं कि मोदीजी का स्वच्छता अभियान सर चढ़ कर बोल रहा है| 30 अप्रैल को जवाहर नगर के लोगों की सुबह सफाई के नज़ारे के साथ हुई| “ सब रोगों की एक दवाई , क्षेत्र में हो साफ़ सफाई ”, “ गांधी जी ने दिया संदेश , स्वच्छ रखो अपना देश ”, हमसब का एक है सपना , सुंदर स्वच्छ नगर हो अपना ”, “ अपना देश साफ़ हो , इसमें सब का हाथ हो ”, लक्ष्मी जी का कहना है , गंदगी में नही रहना है ”, आदि श्लोगन नारों की शक्ल में गूँजते भी रहे | गांधी जी के सपने , मोदी जी के प्रयास और संस्था परिवर्तन के संकल्प स्वच्छ भारत मिशन-2020 के तहत आज संस्था परिवर्तन का वार्ड-43 जवाहरनगर के लोगों ने आदर्श वार्ड बनाने का महाअभियान प्रारम्भ किया| अभियान के अंतर्गत उक्त नजारा रहा जन जागरूकता के एक रोड शो का| संस्था के मिनी ट्रक्स और रिक्शो की टोली के साथ 40 से अधिक सफाई कर्मी शामिल हुए| मानव श्रंखला बना लोगो को जागरूक किया गया| साथ ही क्षेत्रीय लोगो से मिल उनसे निवेदन किया गया की कृपया संस्था परिवर्तन के द्वारा स्थापित कूड़े के कंटेनर्स में ही कूडा डाले| ऐसा करने पर  संस्था के कर्मचारियों और उनके वाहनों एवं संसाधनों के...

गङ्गा मुक्ति के महत्वाकांक्षी महापुरुषों के महाभियान भाग -1

जैसे अरविन्द के आन्दोलन के दौरान अपने अपने हिस्से का हिंदुस्तान मांगने वाले राजनीति और सामाजिक सक्रियता वाले महानुभाव मिल रहे थे वैसे ही अपने अपने हिस्से की गंगा के दीवानों की भी बाढ़ बह चली है| गंगा भक्ति की इस भगवा धार को  उमा भारती ने हाल फिलहाल नमामि गंगे में समेट तो लिया लिया है| लेकिन तमाम महावीर ऐसे भी हैं जो गंगा की व्यथा कथा कह कर वाहवाही भी लिए और ‘व्यवस्था’ में भी काम आये| तकनीकी रूप से गङ्गा सफाई की सरकारी कहानी का एक अध्याय हुआ केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड| इसके जन्म के साथ साथ गंगा सफाई की कवायद तकनीकी रूप से दक्ष लोगों की भूमिका बनी| तकनीकी रूप से दक्ष आईआईटी कानपुर के एक प्रोफेसर साहब इसके पहले मेम्बर सेक्रेटरी हुए| जानकार बताते हैं कि प्रोफेसर साहब अपनी पूरी निष्ठां के कार्य करते हुए साथ जल शोधन इत्यादि तकनीकी कार्यों के महारथी हुए| आई.आई.टी. कानपुर के वही प्रोफ़ेसर साहब बाद में सन्यास ग्रहण करके स्वामी हुए | कुछ लोग तो कहते हैं कि उनको गंगा की दुर्दशा के लिए बोर्ड की कारस्तानी का एहसास हुआ| अपनी गलती समझ आई और उन्होंने गंगा मुक्ति का संकल्प ले लिया| कुछ लोग क...

क्या “जल स्वराज” के नायक बन सकेंगे नगर पार्षद?

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भले ही हमारे नेता और अधिकारीगण भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार चिल्ला के अपना दामन दागदार होने से बचा लें, लेकिन जनता को साथ लिए बिना बनाये गए प्लान फेल होते रहे हैं और आगे भी फेल होने तय हैं| जनता को साथ लेकर वार्ड स्तर के विकास कार्यों में रायशुमारी करके काम हो तो जनता भी उसमे योगदान करने में पीछे नहीं रहने वाली| लेकिन योजनाकारी में जनता को हिस्सेदारी मिले तो साहेब लोगों के निजी हितों को करारी चोट पड़ेगी| इसलिए कोई करना नहीं चाहता| ए2जेड का उदहारण सामने है| नेता और अधिकारी लोगों ने मिलकर शहर के कूड़े का काम तमाम करने का खाका बनाया, फैसला हुआ लखनऊ में| फैसले में  नगर स्वराज की संवैधानिक संस्था नगर निगम का कोई खास रोल नहीं, पब्लिक और पार्षद को पूछने कौन वाला| जिम्मेदारी मिली जल निगम को, जिस पर नियंत्रण राज्य सरकार का| असहाय बना नगर निगम| बदनाम हुए पार्षद|    जबकि 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम के मुताबिक राज्य सरकार के अधिकारों में, प्लानिंग में सीधी हिस्सेदारी होनी चाहिए नगर निगम की, पार्षद लोगों की और वार्ड स्तर पर जनता की| लेकिन जनता के हिस्से में आयी बीस रुपये महीने की द...

कानपुर के पानीदार लोगों से अपील

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वर्षा जल संचयन और जल प्रदायों (बरसाती नाले, नहरों, कुएं और तालाब) के लिए सहयोग करें जल ही जीवन है और शहर का जल संकट भयावह रूप लेता जा रहा है| कानपुर शहर के वर्तमान जल संकट के लिए प्रशासनिक स्तर पर तमाम प्रयास किये जा रहे हैं| इस सन्दर्भ में माननीय जिलाधिकारी महोदय ने कुओं के जीर्णोद्धार के लिए भी अपील जारी की है जिसका सुधी नागरिकों और उद्योगों द्वारा उत्साहपूर्वक स्वागत और समर्थन किया जा रहा है| आपकी एसोशियेशन से जुड़े मेम्बरान के लिए एक खुशखबरी यह भी है कि जिलाधिकारी महोदय की इस पहल में कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी के द्वारा भी आप वर्षा जल संचयन और जल प्रदायों (बरसाती नाले, नहरों, कुएं और तालाबों) को बचाने और बेहतर बनाने में सहयोग कर सकते हैं| आपका यह कदम निश्चय ही आपके द्वारा शहर को दी गयी सौगात साबित हो सकता है| इस नेकनामी से आपके उद्योग को चार चाँद लगेंगे| इसी ख्वाहिश के साथ हम आपके साथ “पानीदार कानपुर” के सपने को साझा करना चाहेंगे| गंगा एलायंस ने जल संकट की इस विकट घडी में भूगर्भ जल के गिरते स्तर को सुधारने के लिए कुछ पहल भी की है| इसमें नागरिकों और उद्योगों को रेन वाट...

किसके भरोसे स्मार्ट सिटी बनेगा कानपुर?

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सच बात तो ये है कि गाँव की परिधि और परिभाषा तय नहीं है यही स्थिति शहर के लिए भी है| जाहिर है कि अगर कोई सवाल करे कि गाँव क्या है या शहर किसे कहते हैं तो शहरी या ग्रामीण विकास के झंडाबरदार साहेब लोग बगले झांकते मिलेंगे| गाँव में भूगोल लेखपाल यानि पटवारी जी के हाथ में होता है तो शहर में अधिकारी जी के हाथ में| अलबत्ता गाँव हो या शहर कानून और नागरिक कर्तव्यों की लाठी सिपाही जी के जिम्मे | पटवारी जी हों अधिकारीजी हों या सिपाही जी अगर ईमानदार हुए तो मुअत्तली का परवाना साथ साथ चलता है| कई बार तो जगह को समझने और लोगों की तकलीफों से रूबरू होने के पहले ही अगले पड़ाव का आदेश मिल जाता है| ऐसे में जमीन से जुड़ने का मौका कहाँ मयस्सर होगा| अब अगर गाँव या शहर में कुछ ही दिन या महीने रहना-रुकना है तो खाने-कमाने के अलावा और क्या करेंगे|   इसी के चलते गाँव अपनी दुर्दशा से बेहाल हैं तो शहरी विकास भी विरोधाभास का शिकार है| स्मार्ट सिटी मिशन के नाम से चल रही योजना में सरकारी दस्तावेज इसी विरोधाभास के पर्याय नजर आते हैं| एक तरफ कहते हैं कि शहर भारत समेत दुनिया के सभी देशों के आर्थिक विकास के इंजन हैं...

गंगा की व्यथा-कथा: नदिया के डॉक्टरों ने लगाई सरसैया घाट पर पंचायत

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कानपुर|   नदिया के लिए डाक्टरी की जरुरत पड़ी है| खबर है कि शहर के विद्वानों ने मुहिम छेड़ी है कि नदी स्वास्थ्य सूचकांक कैसे बने| सरसैया घाट के किनारे लगी पंचायत के लिए सवाल थे कि नदी के स्वास्थ्य का परिक्षण कैसे हो? कैसे कहा जाए कि किसी नदी की हालत नाजुक है या बेहतर| कैसे बयान किया जाए कि अमुक नदी की सेहत का राज क्या है? ये सवाल शहर के लोगों को भले ही नागवार लगते हों| लेकिन इन्हीं सवालों के जवाब में डब्लूडब्लूऍफ़ के राजेश बाजपेई ने नदी स्वास्थ्य सूचकांक की परिकल्पना रखी| साथ ही बताया कि ग्लोबल एनजीओ विश्व वन्यजीव फण्ड के नेतृत्व में गंगा और दुनिया भर की नदियों के लिए नदी स्वास्थ्य सूचकांक बनाने की कवायद शुरू हुई है| विशेषज्ञ के तौर राजेश नदी स्वास्थ्य के मानकों में जरुरी बताते हैं, नदी में पानी की मात्रा को, नदी की धारा के बहाव को, रासायनिक प्रदूषकों की मात्रा को यहाँ तक नदी के किनारे रहने वाले लोगों की सोच और उनके नदी के साथ जुड़ाव को| इन सबके साथ ही साथ हरियाली और जैवविविधता भी नदी के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरुरी मानते है| कार्यक्रम में पूर्व पार्षद मदन लाल भाटिया, आईआईटी के प्रो...

प्राकृतिक संसाधनों की लूट की परियोजनाएं:हमारी बेसहारा गंगा नदी

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने लगता है अपने एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया है। उनके साथ उन लोगों की एक बड़ी जमात जुट गई है जो सत्ता के आसपास रहकर अपने हित साधने में लगी रहती है। मुख्यमंत्री ने आते ही राज्य में बन रही जलविद्युत परियोजनाओं का जिस तरह से पक्ष रखा है, उससे लगता है कि उन्होंने कारपोरेट, परियोजनाओं को बनाने वाली कंपनियों और स्थानीय ठेकेदारों का जबर्दस्त समर्थन किया है।  द हिंदू में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 17 अप्रैल को दिल्ली में नेशनल गंगा रीवर बेसिन अथारिटी की बैठक में विजय बहुगुणा ने कहा पर्यावरण और वन मंत्रालय ने जिन जल परियोजनाओं को तकनीकी मंजूरी दे दी है उन्हें कुछ लोगों की ‘मात्र अनुभूत भावनाओं के कारण’ बंद नहीं किया जाना चाहिए। आश्चर्यजनक रूप से उनकी इस बात का जबर्दस्त विरोध हुआ। विरोध करनेवालों में राजेन्द्र सिंह सहित कई पर्यावरण विद शामिल थे। इस घटना के पंद्रह दिन के अंदर ही राज्य में कई जगह बांधों के पक्ष में प्रदर्शन हुए।  उसके बाद 4 मई को देहरादून में बुद्धिजीवियों का पद्मश्री लौटाने की धमकी का नाटक हुआ।  यह खेल किस तरह से खेला जा...

इस विचित्र देश के कुछ दुर्लभ सीन जिस देश में गंगा बहती है-I

हमारा देश एक विचित्र देश है. जितना विचित्र हमारा देश है. उससे कहीं अधिक विचित्र हमारे नेता लोग हैं. कोई ऐसा मुद्दा जिस में कुछ भी राजनीति करने की गुंजाइश हो उसको हमारे नेता लोग किस तरह लपकते हैं यह व्यंग उसका उदाहरण हैं. पेश है एक ऐसा ही मुद्दा - दिनांक १६ अगस्त - कलमाड़ी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अपील की. उनका कहना है की वह उन्होंने जो भी पाप किये है उनको वह गंगा में नहाकर धोना चाहते हैं.  इसको लेकर अपने समर्थन में उन्होंने तमाम ग्रंथों और पुराणों का हवाला दिया.   दिनांक १७ अगस्त - १२ बजे -  सुप्रीम कोर्ट ने धर्म कर्म में उनकी आस्था को देखते हुए उनकी जमानत ४ दिनों के लिए मंजूर की. (क्यूंकि कोर्ट पहले भी आस्था के आधार पर अपना फैसला एक और मुकदमे में दे चुकी है.) १ बजे- प्रधानमंत्री ने गंगा की सफाई के लिए १००० करोड़ की अतिरिक्त राशि मंजूर की. २ बजे -  येदीयुरप्पा ने भी कर्नाटक से लेकर हरिद्वार तक की यात्रा का ऐलान किया. ३ बजे -  कलमाड़ी ने समस्त भ्रष्ट कांग्रेसियों से अपने पाप धोने की अपील की. उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से हरिद्वार तक पैदल यात्रा...