गंगा बैराज कानपुर : गंगा के अस्तित्व को चुनौती

गंगा बैराज शहर के विस्तारीकरण की एक महत्वकांक्षी योजना जैसा प्रतीत होता है. कहना मुश्किल है कि रिवर व्यू अपार्टमेन्ट और फूलों फव्वारों वाले पार्कों की तैयारी में लगा विकास प्राधिकरण शायद पुराने कानपूर, तिवारी घाट, रानी घाट और साथ लगे हुए हिस्सों को बंद आँखों से देखता है या कर्ज देने वालों की शर्त है कि उस तरफ न देखा जाए. रामकी एनवायरो इंजिनीयर्स और जियो मिलर जैसी कम्पनियाँ किस श्रद्धा के साथ गंगा सेवा में जुडी हैं यह तो मौके की मुआयना करने वालों को नज़र आ जाता है. अंतर निहित उद्देश्यों और दूरगामी परिणामों की बात न भी करें तो भी यह अनायास ही नज़र आ जाता है कि सरकारी परियोजनाएं सफ़ेद हाथी बनती हैं तो कैसे? संवाद करने से ऐसा लगता है कि स्थानीय लोगों को गंगा बैराज के नफे नुकसान से कोई सरोकार नहीं न ही सरकार या सरकारी तंत्र को इसकी को परवाह है.. कच्चे पक्के मकान, टूटी सड़के, बजबजाती नालियाँ, और गंगा जी में प्रत्यक्ष प्रवाहित होते नालों को देख कर तो कतई नहीं कहा जा सकता है कि इस परियोजना का उद्देश्य गंगाजी की निर्मलता या जनसामान्य के भले के लिए किया गया है. ये तो तात्कालिक परिस्थितियां हैं. साथ ही जल प्रवाह और बैराज के फाटकों कि स्थिति देखें तो और स्पष्ट हो जाता है कि गंगा जी के पारिस्थिकीय तंत्र और उसके प्रवाह में कोई सम्बन्ध है या नहीं ये शायद शासक वर्ग और उनके तकनीकी विशेषज्ञों क समझ के लिए दूर की कौड़ी है. जल उपलब्धता इतनी न्यून है की सिर्फ एक फाटक से निहायत प्रदूषित पीले जल की. निकासी करके छद्म प्रवाह की स्थिति बनती है. देख कर समाज नहीं आता है की यही शहर के प्रारंभ में यह हालत है तो शहर के पेय जल और थोड़ी बहुत सिंचाई के बाद यदि 19 नालों का पानी न मिलाया जाए तो कानपुर के दूसरे दूसरे छोर पर गंगा एक नदी के रूप में कैसे पहुंचेगी ? अब कानपुर में यह हालत है तो इलाहबाद और बनारस में गंगा एक नदी के रूप में पहुँचती है या नालों के एक समग्र प्रवाह के रूप में इसकी अनदेखी कैसे की जा सकती है.. वैसे तो कानपुर के एक छोर से दूसरे छोर तक हालत विशेष रूप से किनारों पर रहने वाले पीड़ित जनों की स्थिति लगभग एक जैसी है लेकिन शहर के ही भद्र जनों और गंगा भक्तो की समझ कैसी है गंगा जी का अस्तित्व इस पर भी बहुत निर्भर करता है.











Comments

  1. माँ गंगा की अविरलता निर्मलता हेतु अपील :
    मित्रों! जैसा की आपको विदित है माँ गंगा की अविरलता निर्मलता हेतु "गंगा सेवा अभियानम" के तत्वाधान में पिछले 140 से भी अधिक दिनों से अविछिन्न गंगा तपस्या चल रही है.जिसके अंतर्गत वाराणसी में अबतक 7 तपस्वी अन्न जल त्याग कर गंगा तपस्या (अनशन) कर रहे हैं. हमारी केंद्र की सरकार इन तपस्वियों की अभी तक अनदेखी कर रही है. अत: अब हमें आन्दोलन को देशव्यापी करने की आवश्कता है .
    आप जानते हैं की एकता में बल है. आपमें से जो भी व्यक्ति / संस्थाएँ माँ गंगा की अविरलता निर्मलता के इस जन आन्दोलन में हमारा सहयोग करना चाहते हैं वे अपने शहर गाँव क़स्बा में से ही माँ गंगा की सेवा कर सकते हैं. आपको विदित हो कि- "गंगा सेवा अभियानम" का मानना है कि माँ गंगा की अविरलता एवं निर्मलता के लिए कार्य करने वाली या कार्य करने की इच्छा रखने वाली समस्त सामाजिक संस्थाओं को अपनी पहचान बनाए रखते हुए अपने बैनर के साथ एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है. इस उद्देश्य से "गंगा सेवा महासंघ" के निमार्ण का निश्चय किया गया है. यदि आपकी संस्था या आप "गंगा सेवा महासंघ" का अंग बनकर माँ गंगा की सेवा हेतु कार्य करना चाहते है तो कृपया संपर्क करें-
    srivastava.sajal @facebook.com एवं मोबाइल 09935936222
    आप सभी से विनम्र अनुरोध है कृपया आप देश में माँ गंगा कि सेवा के लिए कार्य करने वाली या कार्य कि इच्छा रखने वाली सामाजिक संस्थाओं से संपर्क करने हेतु हमें संस्थाओं/ उनके प्रबंधकों के नाम पता मोबाइल न. ई -मेल इत्यादि जानकारी उपलब्ध कराने की कृपा करें.

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